मनरेगा में भारी घोटाला: बिना काम भुगतान, फिर काट लिया जाता है मजदूर का हिस्सा – ₹500 देकर बाकी हड़प लेते हैं ग्रामप्रधान, सचिव और रोजगार सेवक!


📍 लोकेशन – महाराजगंज, उत्तर प्रदेश

✍🏻 रिपोर्ट – Prime Media Channel

मनरेगा योजना के अंतर्गत गरीबों को रोजगार और सम्मान दिलाने की जो कोशिश की गई थी, वह ज़मीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती जा रही है। ताज़ा मामला ग्राम गनेशपुर, विकासखंड घुघली का है, जहाँ एक व्यक्ति जयहिन्द पुत्र हरी ने जिलाधिकारी को गंभीर शिकायत दी है।


🔴 क्या है मामला?

पीड़ित के अनुसार, उसकी पत्नी शकुंतला देवी के नाम से मनरेगा योजना में "काम दिखा कर" ₹9,954 की राशि उसके बैंक खाते में भेजी गई। लेकिन यह काम सिर्फ कागज़ों पर हुआ, ज़मीन पर कोई कार्य नहीं कराया गया।

ग्राम प्रधान सचिव और रोजगार सेवक इस भुगतान को निकालने के लिए शिकायतकर्ता के ऊपर दबाव बना रहे हैं। जब जयहिन्द ने इस सरकारी पैसे को निकालने से इनकार किया, तो उसे धमकाया गया – “अगर पैसा खाते से नहीं निकलोगे तो तुम्हें जेल भिजवा देंगे।”

प्रधान सचिव और रोजगार सेवक पर यह आरोप भी सामने आया है कि वो हर ऐसे फर्जी भुगतान में से कार्डधारक मजदूर को मात्र ₹500 देते हैं, बाकी की रकम खुद हज़म कर जाते हैं। शिकायतकर्ता ने बताया कि ग्रामसभा में प्रधान ने अपने ऐसे बहुत से चहेते लोगों के जॉब कार्ड बनाएं है जिस पर फर्जी तरीके से हाजिरी लगाकर बिना कार्य किए निरन्तर भुगतान हो रहा है, सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है, 

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📢 पीड़ित की मांग

जयहिन्द ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई है कि इस भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच हो और सरकारी योजनाओं के नाम पर जो गरीबों का शोषण हो रहा है, उसे रोका जाए।

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⚖️ कानूनी नज़र से

> मनरेगा के तहत बिना कार्य किए भुगतान देना और फिर उस राशि को रिश्वत के तौर पर वापस लेना – दोनों ही गंभीर अपराध हैं। दोषियों पर न सिर्फ विभागीय, बल्कि कानूनी कार्रवाई भी बनती है।

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