अब बांटो मिठाई!… ज़हरीला प्रसाद खिलाने से लेकर पुलिस की लापरवाही तक, रायबरेली का प्रशासन बेनकाब

रायबरेली। सोचने वाली बात है कि ज़िले में नाबालिग बच्ची को प्रसाद के बहाने संदिग्ध ज़हरीला पदार्थ खिला दिया जाता है, बच्ची की हालत बिगड़कर अस्पताल पहुंचती है, मां थाने से लेकर डीएम तक गुहार लगाती है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा छाया रहता है। अब जब मामला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तक पहुंचा, तभी पुलिस-प्रशासन हरकत में आया और एसपी को जांच के आदेश दिए गए। तो क्या अब बांटी जाए मिठाई… कि मामले ने आखिरकार कागज़ी कार्रवाई ही सही, चलना तो शुरू किया?असल सवाल यह है कि जब गरीब गांव की एक महिला अपनी बच्ची के लिए न्याय चाहती है तो पुलिस के फोन क्यों नहीं उठते? शिकायतें महीनों दब क्यों जाती हैं? और आरोपियों को सत्ता और वर्दी का सहारा क्यों मिल जाता है?गांव की महिला आशा पर बच्ची को ज़हरीला पदार्थ खिलाने का आरोप है और इसी मामले में सरोज पत्नी अंकित कुमार का नाम भी जुड़ा है, जिनके पति खुद पुलिस विभाग से जुड़े बताए जाते हैं। यही वजह है कि पीड़िता लगातार यह तंज कस रही है कि "जहां केस करना चाहिए, वहीं से बचाव मिल जाता है।"थाने की पुलिस पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार उन्होंने महिला के घर पर बिना वजह दबिश क्यों दी, और छानबीन उस वक्त क्यों की गई जब घर पर कोई मौजूद नहीं था? क्या यह जांच थी या दबाव बनाने की रणनीति?प्राधिकरण सचिव और अपर जिला जज अनुपम शौर्य ने आदेश दिया है कि पूरा मामला नियमानुसार जांचा जाए और कार्यवाही हो, लेकिन अब बड़ा सवाल यही है कि क्या न्याय सिर्फ आदेशों और नोटिसों तक सीमित रहेगा या वाकई दोषियों तक पहुंचेगा?

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