रायबरेली: भाजपा जिलाध्यक्ष को नहीं पता, नवनियुक्त प्रतिनिधि की 2 साल पूर्व हो चुकी है मृत्यु, जाने क्या है पूरा मामला

लोकेशन- रायबरेली 
रिपोर्ट- सन्दीप मिश्रा

रायबरेली में भाजपा जिलाध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों की पार्टी के प्रति संवेदनहीनता देखने को मिली है। नतीजा मंडलध्यक्ष व प्रतिनिधि की जारी की गई लिस्ट से पता चलता है की पार्टी के जिलाध्यक्ष  उनके पदाधिकारी यह तक पता नहीं लगा पाए की उनका कोई नेता अब इस दुनिया में नहीं रहा और उसे  जिला प्रतिनिधि भी बना दिया। भारतीय जनता पार्टी में मंडल अध्यक्षों व जिला प्रतिनिधियों की सूची जारी की गई। जिसमे जिले में भी 22 मंडल अध्यक्षों का ऐलान किया गया है।उनके साथ में ही 22 जिला प्रतिनिधियों का भी ऐलान बीजेपी प्रदेश कमेटी की तरफ से किया गया है।इसी सूची में एक ऐसा नाम है जो कि अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन इसके बाद भी बीजेपी ने जातीय समीकरण साधने के लिए उनको जिम्मेदारी दे दी है। मृतक संजय मौर्य को मिली यह जिम्मेदारी अब खूब चर्चा का विषय बनी हुई है, सोशल मीडिया पर उनका नाम जमकर वायरल किया जा रहा है।यह सूची पूर्व प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय की संस्तुति पर फाइनल हुई है। जिले में मण्डल अध्यक्ष चुनाव की जिम्मेदारी राकेश मिश्रा के पास थी। जिला प्रभारी पीयूष मिश्रा और पर्यवेक्षक के रूप में प्रदेश महामंत्री संजय राय की देखरेख में मण्डल अध्यक्ष का चुनाव किया गया है। मण्डल अध्यक्ष के पद में जातीय आधार पर समीकरण को खूब साधने की कोशिश की गई है। जिसमे विधानसभा वार जारी लिस्ट में पार्टी की तरफ से यादव बिरादरी को दरकिनार किया गया इसके अलावा ओबीसी की अन्य जातियों को भी कम भागीदारी मिल पाई है। मण्डल अध्यक्ष के विभिन्न पदों को लेकर लोगों में जहां खूब आपत्ति जताई जा रही है तो वहीं मृतक संजय मौर्य को जिम्मेदारी देना बहुत ही चर्चा का विषय बना हुआ है। 
बीजेपी की तरफ से राही ब्लॉक का उसे जिला प्रतिनिधि बनाया गया है, उसकी मृत्यु 18 मई 2022 को हो चुकी है। संजय मौर्य को यह जिम्मेदारी बीजेपी की तरफ से जातिगत वोट साधने के लिए दी गई है, लेकिन प्रश्न बीजेपी के पूरे सिस्टम पर है आखिर क्या उन्होंने सिर्फ नाम देखकर ही लोगों को अहम पदों की जिम्मेदारी दे दी है। फिलहाल सोशल मीडिया पर संजय मौर्य का नाम तेजी के साथ में दौड़ रहा है।

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