डलमऊ पुलिस ने लेखपाल पंकज वर्मा को बचाने के लिए नहीं लिखी दुष्कर्म की रिपोर्ट!


रायबरेली: जनपद के ऊंचाहार तहसील में तैनात लेखपाल पंकज वर्मा पर गंभीर आरोप लगने के बावजूद डलमऊ पुलिस ने संविधान की शपथ को किनारे रखकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से साफ इंकार कर दिया है।

मामला थाना क्षेत्र के चक मलिक भीटी गांव का है। पीड़िता महिला का आरोप है कि गांव का ही रिंकू लोध देर रात घर में घुस आया और दुष्कर्म की कोशिश की। इस दौरान रिंकू लोध के साथ लेखपाल पंकज वर्मा और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति भी मौजूद थे। महिला का कहना है कि तीनों ने उसके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गए।

महिला ने थाने में तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने पंकज वर्मा को ‘ईमानदार और चरित्रवान’ बताकर रिपोर्ट दर्ज नहीं की। पुलिस का तर्क है कि गांव वालों से पूछताछ में पता चला कि उस समय पंकज वर्मा चिकनपॉक्स से ग्रसित थे।

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब डलमऊ पुलिस पर पंकज वर्मा को बचाने का आरोप लगा हो। खुद उनकी पत्नी की शिकायत भी पुलिस ने एक हफ्ते बाद दर्ज की थी और तहरीर तक गायब कर दी थी। इतना ही नहीं, पत्नी ने आरोप लगाया था कि पंकज वर्मा आर्केस्ट्रा में शामिल रहते हैं और शादीशुदा होने के बावजूद चोरी-छिपे दूसरी शादी की तैयारी कर रहे थे, जिसे खुद उसने जाकर रुकवाया था।

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि महिला की ओर से दुष्कर्म का प्रयास और धमकी का आरोप लगाया गया है, ऐसे में सबसे पहले रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू करना पुलिस की जिम्मेदारी थी। लेकिन उल्टा पुलिस ने मामले को केवल मारपीट की धारा में दर्ज कर यह साफ संकेत दे दिया कि पंकज वर्मा और डलमऊ पुलिस के बीच गठजोड़ है।

न्याय की आस में अब पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक के बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

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